दीदी की सास की गांड फाड़ी

हैल्लो दोस्तों, में विशाल एक बार फिर से आप सभी चाहने वालों के सामने हाजिर हूँ. दोस्तों मेरी पिछली जितनी भी कहानियाँ है वो सभी एक सत्य घटना है. तो हुआ यह कि में मेरे घर वालों के बहुत कहने पर में अपनी दीदी के घर पर 03.03.2016 को पहुंच गया. वहां पर मेरी दीदी की ननद की शादी थी और वो एक विधवा औरत थी. उसकी शादी एक बार फिर से किसी और के साथ हो रही थी. में दीदी के घर पर पहुंचा तो मुझे देखकर सभी लोग बहुत खुश हुए.

मैंने सभी बड़ो के पैर छुए और जब में उनकी सास के पैर छूने गया तो वो उस समय सोफे पर बैठकर कुछ पेपर देख रही थी और मुझे उनकी मस्त गोरी उभरी हुई छाती दिख रही थी, इसलिए मैंने थोड़ा सा देखा जरुर था, लेकिन मैंने वैसा कुछ ग़लत नहीं सोचा. मैंने पैर छुए उन्होंने मेरे सर पर अपना एक हाथ रखकर मुझे आशिर्वाद दिया और फिर में दीदी से पूछकर फ्रेश होने चला गया. फ्रेश होकर जब में बाहर आया तो उस वक़्त दोपहर के एक बज चुके थे.

अब मैंने खाना खाया और सोफे पर बैठ कर अपने भांजे से बातें करने लगा तभी उसकी सास मेरे सामने से गुज़री, क्या बताऊँ दोस्तों? अगर आप मेरी जगह वहां पर होते तो उससे पकड़कर चोद देते. उसके बूब्स कम से कम 42 इंच का होगा और उसकी गांड बिरयानी के हांडी की तरह बड़ी और होंठ थोड़े हल्के गुलाबी कलर के थे. उसको देखते ही मेरा मन उनको अपने मुहं से लगाने का हुआ. फिर मैंने अपने भांजे से कहा कि में अभी वॉशरूम से आता हूँ और फिर मैंने बाथरूम में जाकर अपने लंड पर बहुत सारा शैम्पू लगाया और बहुत जमकर ज़ोर ज़ोर से अपना लंड हिलाया और उसकी सास को सोचकर में मुठ मारने लगा. मैंने सोचा कि में उसको बहुत जमकर चोद रहा हूँ और उसका दूध पी रहा हूँ.

फिर 10 से 15 मिनट बाद मेरा माल गिर गया और अब में थोड़ा सा शांत हुआ में फ्रेश होकर बाहर आया तो मैंने देखा कि मेरी दीदी की सास मेरे भांजे से बातें कर रही है. में भी उनके पास में जाकर बैठकर उसे घूरने लगा और इतने में मुझसे उसने पूछा कि क्यों कैसे हो विशाल और तुम्हारा काम कैसा चल रहा है? तो मैंने कहा कि हाँ मम्मी जी सब ठीक है मेरा काम भी एकदम ठीक आप आपकी बताओ. फिर उन्होंने मुझसे कहा कि हाँ सब ठीक ही है, दोस्तों उनके पति की तीन साल पहले किसी बीमारी से म्रत्यु हो गयी थी.

अब तीन बज़ रहे थे और मुझे नींद आने लगी. में उठा और मैंने देखा कि पास का एक रूम खाली था और में उसमें जाकर सो गया. करीब 6 बजे मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि वो रूम मेरी दीदी की सास का था और मुझे दीदी की सास ने उठाया और में उठा. उन्होंने मुझसे कहा कि 6 बज गये है तुम अभी तक सो रहे हो. फिर मैंने उनसे कहा कि मुझे टाइम का पता ही नहीं चला में उठकर फ्रेश हुआ और मैंने अपनी दीदी से कार की चाबी ली और थोड़ा बाहर घूमने निकल पड़ा. घूमते घूमते मुझे दीदी की सास का ख्याल आया कि वो अगर मुझे एक बार मिल जाए तो मज़ा आ जाएगा और थोड़े दूरी चलने के बाद मैंने एक वाइन शॉप देखी में कार से नीचे उतरा और मैंने एक बियर और एक विस्की की बोतल खरीदी और उसको में कार में ही बैठकर पी गया.

उसके बाद मैंने कार को स्टार्ट करके आगे बढ़ा लिए और फिर में करीब रात के दस बजे घर पर पहुंचा. में उस समय बहुत नशे में था, तो घर पर दीदी मुझे बोली कि विशाल क्या तूने पी है? मैंने उनसे कहा कि दीदी मेरा आज दिल किया प्लीज आप मुझे माफ़ कर दो. अब दीदी मुझसे बोली कि तू कभी नहीं सुधरेगा, चल फ्रेश होकर खाना खा और में चला गया कुछ देर बाद में फ्रेश होकर खाना खा रहा था, लेकिन दीदी की सास मुझे अब कहीं नज़र नहीं आ रही थी मैंने दीदी से पूछा कि दीदी मम्मी जी कहाँ है वो मुझे कहीं दिखाई नहीं दे रही है? तो वो बोली कि मम्मी जी अपने रूम में खाना खा रही है और मैंने उनका जवाब सुनकर कहा कि ठीक है.

अब में खाना खाकर अपने रूम में गया और बेड पर लेटकर मुझे ख्याल आया कि क्यों ना ब्लूफिल्म देखी जाए? अब मैंने एक ब्लूफिल्म को डाउनलोड किया और में वो देख रहा था, जिसकी वजह से मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया था कि तभी मेरा भांजा आ गया और वो मुझसे बोला कि मामा जी क्या में भी यहाँ पर सो जाऊँ? तो मैंने कहा कि हाँ सो जाओ और वो मेरे पास आकर सो गया. मैंने ब्लूफिल्म को बंद कर दिया और करीब 11 बजे मेरी दादी आई वो उससे बोली कि समर चल बेटा अब तुझे सोना है.

फिर मैंने उनसे कहा कि समर तो मेरे पास सो गया है, उन्होंने कहा कि ठीक है और वो चली गयी. में बेड पर लेटा रहा कभी म्यूज़िक सुनता तो कभी गेम खेलता. ऐसे ही टाईम कुछ 12 बज रहे थे और मुझे पता नहीं था.

तभी मेरे दिमाग़ में एक ख्याल आया क्यों ना चान्स मारा जाए? में उठा चुप के से बाहर गया देखा सभी लोग सो रहे थे. में धीरे से अपनी दीदी की सास के कमरे में चला गया और मैंने अंदर जाकर दरवाजा धीरे से लगा दिया उस समय रूम में नाइट लेम्प जल रहा था. उनकी सास को में अच्छी तरह से देख रहा था वो गहरी नींद में सीधे एक लाश की तरह पड़ी हुई थी. उनको देखकर मेरी तो नियत खराब हो गई और में उसकी उभरी हुई छाती को देखकर में धीरे से आगे बड़ा और मैंने पास जाकर उनकी मेक्सी को उनकी जांघो तक चूत के ऊपर तक ले गया और अब में उनकी चूत को सूंघने लगा अफ्फ वाह क्या महक थी. जैसे पिछले 100 साल से कोई चूहा उस जगह पर मरा पड़ा हो मैंने करीब पांच मिनट तक उसकी सड़ी हुई चूत को सूँघा और मेरा लंड टनकर खड़ा होने लगा.

अब में अपना खड़ा हुआ लंड बाहर निकालकर हिलाने लगा और बीच बीच में उनकी चूत को सूंघने लगा करीब 10 से 15 मिनट के बाद मेरा माल गिरने वाला था. मैंने अपने एक हाथ में अपना सारा माल निकाल लिया और उनकी चूत पर लगा दिया अफफफफ हल्के हल्के बालों वाली चूत मेरे माल से पूरी गीली हो गई थी. में फिर थोड़ा सा ठंडा हुआ और करीब आधे घंटे के बाद उनकी चूत पर धीरे धीरे हाथ फेरना चालू किया, जिसकी वजह से मेरा लंड एक बार फिर से तन गया. मैंने सोचा कि आज जो भी होगा देखा जाएगा और आज तो में इसको जरुर चोदूंगा. दोस्तों में इतने नशे में था कि मुझे किसी भी बात का डर भी नहीं लग रहा था.

में बेड पर बैठा और मैंने उनके पैर धीरे धीरे अलग किए. दोस्तों उनका पैर भारी और मोटा था. उसको उठाने में मेरा हालत खराब हो गई थी. फिर मैंने अपने लंड को हिलाया और उनकी चूत पर टिकाकर धीरे धीरे चूत को सहलाता रहा था, लेकिन अब मुझसे रहा नहीं गया और मुझे सेक्स चड़ गया था.

मेरे लंड में जोश आ गया था. फिर इतने में मेरा माल उनकी चूत पर छप छप करके गिर गया और वो उठ गई और बोली कि कौन विशाल, क्या हुआ, तुम यह क्या कर रहे हो और तुमने यह क्या किया? तभी उन्होंने अपनी गीली चूत पर एक हाथ रखा और मुझसे कहा कि रूको में अभी तुम्हारी दीदी को बताती हूँ कि तुमने मेरे साथ यह सब क्या किया?

मैंने उनसे कहा कि में आपको मेरी दीदी की शादी के समय से ही बहुत पसंद करता हूँ और में आपको दिल से बहुत ज्यादा चाहने लगा हूँ इसलिए आज मुझसे आपको देखकर बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं हुआ और आज मेरा आपके साथ संभोग करने का मन कर रहा था, इसलिए मैंने आपके साथ यह सब किया.

फिर उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हे थोड़ी सी भी शरम है कि नहीं? तुम अपने से इतनी बड़ी उमर की एक औरत के साथ चुदाई करोगे तो तुम्हारी तबीयत खराब हो जाएगी. अब मैंने बोला कि वो सब मुझे पता नहीं, लेकिन में आज आपको एक बार खुश करना चाहता हूँ. तभी उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे सेक्स करने में कोई भी रूचि नहीं है तुम जाओ यहाँ से, लेकिन मेरा लंड थोड़ा थोड़ा फिर से खड़ा हो रहा था.

मैंने उससे कहा कि प्लीज एक बार मुझे लगाने दीजिए जब मेरा माल गिर जाएगा तो में यहाँ से अपने आप चला जाऊंगा. अब वो मुझसे बोली कि चुपचाप बाहर जाओ यहाँ से, नहीं तो में तुम्हारी दीदी को बुला दूँगी. दोस्तों में तो उस समय नशे की हालत में था और उन्हे मनाने के लिए मैंने सब कुछ झूठ बोला, लेकिन वो साली मान ही नहीं रही थी. मेरे कुछ भी समझ में नहीं आया.

अब में जबरदस्ती उसके होंठो को पकड़कर चूसने लगा और बूब्स को दबाने लगा. वो मुझे दूर हटा रही थी, लेकिन में नहीं सुन रहा था. उसे मैंने ज़ोर ज़बरदस्ती बेड पर लेटा दिया और अब में उसके ऊपर चढ़कर चूसने लगा और उसके बूब्स को दबाने लगा. वो बोलती रह गई प्लीज छोड़ दो मुझे विशाल में सब को बोल दूँगी. दोस्तों में भी उस समय नशे और पूरे जोश में था.

मैंने उनसे कहा कि हाँ जाओ बोल दो, लेकिन आज मेरी इतने सालों की प्यास तो बुझ ही जाएगी. मैंने अब उसकी मेक्सी को पूरा ऊपर उठाकर अपने लंड उसकी चूत के मुहं पर रगड़ना शुरू किया और अब में उसके दोनों हाथों को पकड़कर चूमने लगा. अब मेरा लंड गरम हो रहा था और वो अपने आपको मुझसे छुड़वाने की नाकाम कोशिश में लगी रही. मैंने अपने दोनों पैर से उसके दोनों पैर फैला दिए और लंड को उसकी चूत के निशाने पर रखकर एक ज़ोर का धक्का मार रहा था, लेकिन मेरा लंड साला अंदर ही नहीं जा रहा था. फिर में उठा और में अपनी दो उंगली उसकी चूत में डालकर गप गप आगे पीछे रहा था.

फिर वो बोल रही थी हे राम यह सब क्या हो रहा है छोड़ो मुझे आह्ह्हह्ह आह्ह्ह. फिर करीब दस मिनट तक ऊँगली को अंदर बाहर करने के बाद मैंने महसूस किया कि उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी. मैंने झट से अच्छा मौका देखकर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और लंड फिसलता हुआ थोड़ा सा अंदर जा पहुंचा और वो ज़ोर से चीखने लगी अह्ह उफफ्फ्फ्फ़ मुझे बहुत दर्द हो रहा है में सह नहीं सकती, लेकिन मैंने कोई परवाह नहीं की और मैंने दोबारा एक जोर से धक्का देकर गप से अपने लंड को अंदर डाल दिया.

उसके बाद मुझे उसकी चूत में गर्मी सी लग रही थी और में गप गप गप चोद रहा था. में इतने जोश में आ गया था कि मैंने उसकी मेक्सी और ब्रा दोनों को एक साथ ज़ोर से झटका देकर फाड़ दिए थे, जिसकी वजह से उसके दोनों 10-10 किलो के बूब्स अब बाहर आ गये थे और में दोनों बूब्स को एक एक करके चूसने लगा और अब उनकी चुदाई बहुत ज़बरदस्ती हो रही थी. में पागल कुत्ते की तरह उसकी चूत में अपने लंड को धक्के देखकर उसको चोद रहा था और वो भी कुछ देर बाद अब मान गई और मेरा पूरा साथ देने लगी थी. अब में गप गप धक्के देकर चोद रहा था और उनकी चूत से छप छप की आवाज़ आ रही थी.

में लगातार जोरदार धक्के देकर चोदता गया अहहाहा अईईईई ऊऊऊ मेरी जान गप गप छप छप और अब मेरा माल उसकी चूत में छपक करके अंदर चला गया उफ़फ्फ़ आऊऊओ और में उसके ऊपर लेट गया और वो बोली कि मज़ा ले ही लिया ना, मुझमें तुझे ऐसा क्या मिला? जो तूने मेरे साथ यह सब किया. फिर मैंने बोला कि आप इतनी मोटी माल हो और मुझे मोटी माल चोदने में राहत मिलती है. फिर वो मेरी बात को सुनकर हंसी और बोली कि पिछले 20 साल से मेरी चूत एकदम सूखी थी. आज तुमने इसको गीला कर दिया और फिर से मुझे जगा दिया है. मेरी चूत को अपने लंड का आदि बना दिया है. अब तुम चले जाओगे तो मुझे कौन चोदेगा? तो मैंने कहा कि में हर महीने तो नहीं, लेकिन हाँ जब भी मुझे समय मिलेगा में यहाँ पर जरुर आया करूँगा और फिर में उसे चारों तरफ चूमने लगा.

वो सेक्स में गरम हो गयी और मैंने उसे अब उल्टा घुमा दिया. ऊउह्ह्ह्फ़ क्या गांड थी दोस्तों? आकार में इतनी बड़ी की उसमें करीब पांच लंड एक साथ घुस जाए. फिर मैंने उसकी पूरी गरम पीठ को कुत्ते की तरह चाटा और फिर गांड को दाँत से काटा उसके बाद गांड को फैलाकर उसके अंदर अपनी जीभ को डालकर चाटने लगा, जिसकी वजह से वो पागल होने लगी थी. वो बोली उफफ्फ्फ्फ़ प्लीज इतना भी मज़ा मत दो कि में पागल हो जाऊं आह्ह्ह्ह. दोस्तों गांड को चाटते चाटते मेरा लंड एक बार फिर से गरम हो रहा था. मैंने कहा मम्मी जी आपकी गांड बहुत सुंदर है मेरा लंड आज एक बार आपकी गुफा में जरुर जाना चाहता है.

फिर वो बोली कि नहीं, मुझे बहुत दर्द होगा. तुम प्लीज आगे से ही करो, लेकिन मैंने बोला कि बस एक बार, लेकिन वो नहीं मानी और में लगातार चूसता रहा. फिर करीब 15 से 20 मिनट के बाद वो राज़ी हो गयी. फिर में उठा और टेबल से तेल लेकर आया. मैंने उनकी गांड के छेद पर बहुत सारा तेल लगाया और अपने लंड पर भी लगाया. उसके बाद लंड को गांड के छेद पर रखकर धक्का दे रहा था.

करीब 10 मिनट बाद आधा लंड अंदर गया होगा कि वो बहुत ज़ोर से चीख पड़ी उफ्फ्फ्फ़ आईईईइ विशाल प्लीज बाहर निकालो मुझे बहुत दर्द हो रहा है, निकालो इसे बाहर माँ में मर जाउंगी. फिर मैंने कहा कि मम्मी ज़ी थोड़ा रूको आपका दर्द कुछ देर बाद कम हो जाएगा. अब मैंने अपनी स्पीड को बड़ा दिया और वो ऊऊऊ आह्ह्ह्हह करती रही. दोस्तों मुझे भी अब थोड़ा सा दर्द हो रहा था अफफफफ मम्मी जी क्या मज़ा है आपकी गांड में मज़ा आ गया? तो वो बोली कि तुम्हे मज़ा आ रहा है मुझे दर्द हो रहा है मेरी चूत के अंदर मत निकलना. फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है और गपा-गप चुदाई चल रही थी. करीब 25 से 30 मिनट की चुदाई के बाद मैंने धक्को की स्पीड को बढ़ा दिया और सर सर करके अंदर ही डाल दिया. वो बोली आख़िर में अपना ही काम किया तुमने और में अब बहुत थककर लेट गया और हम दोनों एक दूसरे से चिपककर करीब ऐसे ही लेटे रहे. अब 5 बज रहे थे और मम्मी ज़ी ने मुझे उठाकर कहा कि तुम अपने रूम में जाओ.

फिर में उठा और उनके बूब्स को देखकर फिर लंड खड़ा हो गया. मैंने कहा कि मम्मी जी एक आखरी बार और करने दो, तो वो मेरी बात को सुनकर हंसी और बोली कितना तुझमें कितना जोश है, तू थकता नहीं क्या? अब मैंने कहा कि में थक गया था, लेकिन आपके बूब्स को देखकर में दोबारा गरम हो गया और वो फिर से लेट गयी. मैंने उनके दोनों पैर उठाकर लंड को चूत में डाल दिया और चप चप की आवाज़ के साथ में चुदाई कर रहा था और बूब्स को भी चूस रहा था ओह्ह्ह्ह वाह मम्मी ज़ी आह्ह्ह्ह हाँ गप गप कभी में उनके होंठो को चूस रहा था तो कभी बूब्स को दबा दबाकर पी रहा था. कुछ देर बाद मैंने कहा कि मम्मी ज़ी आ गया है ओह्ह्ह्हह मम्मी ज़ी तुम बहुत अच्छे हो योऊऊ आह्ह्ह्ह मम्मी ज़ी ओह्ह्ह छप छप छप और फिर मैंने अपना माल उनकी चूत के अंदर डाल दिया.

वो कुछ देर बाद मुझसे बोली कि अब तुम चले जाओ, में उठा और अपने रूम में जाकर सो गया. करीब 11 बजे मेरी दीदी मुझे उठाने आई विशाल उठ अब कितना सोएगा? मैंने कहा कि हाँ दीदी बस में दो मिनट में उठता हूँ, लेकिन में फिर से सो गया करीब 12 बजे मम्मी जी मेरे कमरे में आई और उन्होंने मुझसे कहा कि उठो विशाल, तो में उठकर बैठ गया. अब मैंने पूछा कि क्या हुआ मम्मी ज़ी, उन्होंने कहा कि पता नहीं मेरी चूत से खून निकल रहा है, तुम मुझे दवाई लाकर दो, जाओ जल्दी मुझे चलने में बहुत तकलीफ़ दर्द हो रहा है.

फिर में उठा फ्रेश होकर मेडिकल स्टोर से दवा लेकर आया और मैंने मम्मी ज़ी को दी. वो दवाई को खाकर सोने चली गयी और फिर उसी शाम को हम समारोह में गये और बहुत रात को आये और फिर रात में मैंने आंटी को मुहं में अपना लंड चूसवाना शुरू किया. उसके बाद में सो गया और दूसरे दिन मेरी ट्रेन थी, तो में जाने के लिए तैयार हो गया. मैंने सबके पैर छुए और जब मम्मी जी के पैरों को छुआ तो वो हंसने लगी और फिर में अपने घर पर चला आया.